सांप का मरना



यह सांप खुले आसमान के नीचे रेत में मरा पड़ा था। कोई चोट का निशान नहीं। किसी अन्य जीव के चिह्न चिन्ह नहीं (यद्यपि रेत पर हवा चिन्ह चिह्न मिटा देती है)। अकेला मरा सांप।

बूढ़ा था क्या? बुढ़ापा मारता है तो यूं चलते फिरते खुले आसमान के नीचे? सांप को दिल का दौरा पड़ता है क्या?

Dead Snake

Dead Snake2

सांप की दायीं आंख सफेद पड़ चुकी थी। सांप के शरीर में जो सामान्य चमक होती है, वह समाप्त होती जा रही थी। जिस प्रकार से वह मरा था, उससे लगता था कि रेत में भटक गया था वह और आगे बढ़ कर रेत पार कर सकने की ताकत नहीं बची थी।

पता नहीं रेत में सांप चल पाते हैं या नहीं! मेरा कयास है कि जैसे चिकनी सतह पर चलना चाहिये, वैसे ही वे साइडवेज़ लूप बना कर चलते होंगे। यहां पर मरने की दशा में यह सांप तो सर्पिलाकार चाल में प्रतीत नहीं होता!

Sideways

अपडेट – यह है फ्लिकर से प्राप्त रेत के साइडविण्डर सांप का चित्र! यह सर्पिल गति ले कर अपने शरीर को साइड में धकेलता चलता है। आप टिप्पणी में पंकज अवधिया द्वारा प्रस्तुत वीडियो देखें! 

Sidewinder


रेंवा



रेंवा की रेत में ट्रेल

रात गहराती है तो बोलता है रेंवा। मध्यमा उंगली जितना कीड़ा है यह। रात का सन्नाटा हो तो यह आवाज सुनाई देती है। झनझन की आवाज। रेंवा बोलता है, मानो रात बोलती है।

गंगा की रेत में एक लम्बी ट्रेल मिली। मानो कोई जीव बहुत लम्बी यात्रा कर के गया हो। करीब आधा किलोमीटर तक तो मैने उस ट्रेल को फॉलो किया। एक सज्जन दातुन मुंह में दबाये चले आ रहे थे – उनसे पूछा – ये किसके पैर हो सकते हैं।

लोग यहीं रह रहे हैं बचपन से। चढ्ढी पहनने का शऊर नहीं रहा होगा, तब से यह रेती, यह पानी की धारा देखते रहे होंगे। अधेड़ हो गये हैं वे सज्जन। पर लगता है देखने का शऊर अभी भी न आया। बोले – कोई चिड़िया है।

चिड़िया? पर इतनी दूर तक रेत में क्यों चली? उड़ी क्यों नहीं?

उन्होने दूसरा कयास लॉब किया – केछुआ होये!

कछुआ बहुत सही लगा कयास मुझे। शायद कछुये का बच्चा हो। दूर तक चलता चला गया और अंतत गंगाजी में कूद गया हो। अगले तीन चार दिन तक हम पांड़े दम्पति इस तरह की ट्रेल देखते और अनुमान लगाते रहे कि छोटे कछुये कहां से चल कर कहां जा रहे होंगे।

पर आज सवेरे सारी कल्पनायें ध्वस्त हो गयीं। पत्नीजी ने देखा कि  एक कीड़ा चलता चला जा रहा है और उसके चलने के निशान वही हैं जो हम पिछले कई दिनों से देखते आये हैं। अरे, यह तो रेंवा है!

रेंवा की डिसकवरी की थ्रिल जल्दी ही फिक्र में तब्दील हो गयी। अरे, जल्दी यह कहीं ठिकाने पर पंहुच जाये वर्ना कोई चिड़िया इसे सुबह के पहले कीड़े के रूप में उदरस्थ कर जायेगी। जल्दी जाओ रेंवाप्रसाद अपने गंतव्य। तुम रात के जीव हो, दिन में तुम्हारा टहलना निरापद नहीं!

फोटो? मेरा मोबाइल कैमरा बेकार निकला इस जीव का चित्र लेने में। पैर से रोकने पर रेंवा थम नहीं रहा था – दायें बांये से निकल कर चलता ही जा रहा था। और चलने वाली चीज का चित्र मोबाइल का कैमरा हैंचता नहीं ठीक से! :)

रेंवा का धुन्धला चित्र|

 


कुछ बेतरतीब विचार



1. भुल्लर यादव की पतोहू गाय की नांद में कबार डालती जा रही थी और कान से सटाये मोबाइल से बतियाये भी जा रही थी। अच्छा लगा। भुल्लर यादव की पतोहू का पति एक सड़क दुर्घटना में पर साल चला गया था। जिन्दगी जीने का अपना रास्ता खोज लेती है।

2. वह बुढ़िया पगलोट है। कनेर का फूल तोड़ते कुछ गुनगुना रही थी। क्या मधुर गला पाया है! एक राह चलता पूछ रहा था – गंगा नहा आई? तुरंत जवाब दिया –  “देखत नाहीं हय, तबियत खराब बा। बारह बजे नहाब। आपन फिकिर खुदै करे पड़े न!”

3. जल्लदवा आता है कमीज के बटन खुले। लुंगी गमछे की तरह अधोवस्त्र के रूप में लपेटे। मुंह में मुखारी। एक उलटी नाव के पास बैठ कर देर तक दातुन करता है। मोटा और गठे शरीर वाला है। तोन्द निकली है। मेरा अनुमान है कि निषाद घाट पर कच्ची शराब का डॉन है वह। एक और नौजवान पास में ही एक लाठी दोनो कन्धों पर पीछे से फंसा कर दांये बायें शरीर घुमाता है, देर तक। उसके गले में सोने की चेन है और उसमें बड़ा सा लॉकेट। सुपरवाइज करता जा रहा है नाव से पानी निकालने की प्रक्रिया। उसी नाव में कच्ची शराब के पीपे जाते हैं उस पार। हैण्डसम है बन्दा!

4. पण्डा ने अपनी चौकी की पोजीशन बदल कर घाट की सीढ़ियों पर कर ली है। जवाहिर लाल वहीं बैठा था पुरानी जगह पर मुखारी करता! सवर्ण और विवर्ण अलग अलग हो गये। बहुत बड़ी खबर है ये।

5. गायों का एक झुण्ड रेत में बैठा था। अनयूजुअल! गंगा की रेती में ऊंट और खच्चर चरते देखे हैं, पर गायें नहीं। एक कुत्ते ने उन्हे लोहकारा तो उठ कर पास के परित्यक्त खेत में जा कर चरने लगीं। मेरा फोटो खींचना असहज महसूस कर रही थीं। आदमी होतीं तो जरूर कहतीं – काहे फोटो हैंचत हय हो?

6. एक भैंस एक नाव के पास चर रही थी। गायें और भैंसे लगता है छुट्टा छोड़ दी हैं चिल्ला वालों ने। अब सब्जी नहीं निकलनी हैं तो बची बेलें ही चर लें ये। ऊंट तो पहले से चर रहा था॥ … पर मिस्टेक हो गयी। बोले तो गलती! जब फोटो लेने लगा तो भैंस मुंह ऊपर कर अपने नथुने सिकोड़ कर सांस छोड़ने लगीं। ध्यान से देखा तो पाया कि वह भैंस नहीं, भैंसा है। दवे पांव वापस होना पड़ा! ह्वाट अ ब्लॉगर अनफ्रेण्डली क्रीचर!

Bhains

7. रामदेव का पक्ष मुझे नहीं भाता। बन्दा अपनी पॉलिटिक्स चमका रहा था। पर रात में सोते लोगों पर लाठी चार्ज जमा नहीं। आज सुप्रीमकोर्ट में पी.आई.एल. है इस दमन के खिलाफ। देखें क्या होता है। मैने तो एक चीज सोची है – फेसबुक पर मेरे तथाकथित मित्रों में जो इस दमन से प्रसन्न हो कर माइक्रोब्लॉगिंग ठेल रहे थे, उनको चुन कर डिलीट कर दूंगा। ऐसे लोग मित्र नहीं हो सकते। बहन-बच्चों के अपमान में साडिस्ट प्लेजर लेने वाले लोग!

8. पिछले कुछ दिनों में कई ब्लॉग पोस्टें देखी हैं – बहुत सही। कण्टेण्ट – लिखित और फोटो संयोजन लाजवाब। हिन्दी ब्लॉगरी में हीहीफीफी बढ़ी होगी पर लोग पहले से कहीं बेहतर अभिव्यक्ति भी देने लगे हैं। चिठ्ठाचर्चा चला रहा होता तो लिंक-फिंक देता। फिलहाल तो अहो भाव ही व्यक्त कर रहा हूं। बाकी, सुकुल तो कर ही रहे होंगे लिंकाने का काम?!

9. बाकी, फिर कभी!


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