मध्यकाल से लोग कलात्मकता को नकारते रहे हैं इस इलाके में

मध्य काल में औरतों को पर्दे में बंद कर इस गांगेय प्रदेश ने जीवन के कला बोध भोथरे कर दिये हैं। आदमी भी वैसे ही हो गए हैं – चिरकुट।


मेरे स्वर्गीय पिताजी कहते थे कि कार्पेट घास का लॉन अच्छे कालीन से ज्यादा महंगा पड़ता है। हमने भदोही में रहते हुए भी कभी कालीन खरीदने की हिम्मत नहीं जुटाई। पर राम सेवक जी घर के एक छोटे हिस्से में कार्पेट घास लगा रहे हैं।

#गांवदेहात में अटपटी बात!

राम सेवक ढाई सौ वर्ग फुट के इस हिस्से में कार्पेट घास लगा रहे हैं।
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पेण्ट माई सिटी प्रॉजेक्ट, प्रयागराज


Paint

प्रयागराज गया था मैं पिछले मंगलवार। ढाई दिन रहा। शिवकुटी का कोटेश्वर महादेव का इलाका बहुत सुन्दर चित्रों वाली दीवालों से उकेरा हुआ था। पहले यह बदरंग पोस्टरों से लदा होता था। बड़ा सुन्दर था यह काम।

(अर्ध) कुम्भ मेला तीन महीने में होगा प्रयागराज में। कई शताब्दियों बाद शहर का नाम पुन: प्रयागराज हुआ है। शिवकुटी में जो भी लोग मिले, सबने कहा कि मैं मेले के समय प्रयाग में ही रहूं। ये चित्र देख कर जोश मुझे भी आ रहा था कि प्रयागराज में अगले कुम्भ मेले के दौरान रहना अच्छा अनुभव होगा। Continue reading “पेण्ट माई सिटी प्रॉजेक्ट, प्रयागराज”