सेमरी के आगे से बिक्रमगंज


प्रेमसागर आगे की यात्रा की बात कर रहे हैं। तबियत ठीक नहीं है। होली का मौसम है। लोग रास्ते भर हुड़दंग करने वाले होंगे ही। पर उनको तो चलना है। चरैवेति, चरैवेति!

बारा से बक्सर


मीठे पानी की गांगेय डॉल्फिन बड़ी संख्या में हैं – यह सुन कर मुझे अपार हर्ष हुआ। … मैं डॉल्फिन को ले कर प्रसन्न था और प्रेमसागर चैन की सांस ले रहे थे – “अब करमनासा का झंझट खतम!”

जमानिया से गहमर-बारा


बारा में एक शिव मंदिर में रहने को स्थान मिल गया। मंदिर के भईया जी ने कहा कि वे प्रेमसागर के लिये भोजन भी बना देंगे। चहकते प्रेमसागर ने बताया – “मेन बात भईया कि पीपा पुल, जिसे कल सवेरे पार करना है, वह बगल में ही है।”

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free