योगद्या शक्तिपीठ और नवद्वीप


उन्हें रात्रि गुजारने के लिये कोई स्थान नहीं मिला। वे इस उहापोह में थे कि क्या नवद्वीप जा कर चैतन्य महाप्रभु के जन्मस्थान का दर्शन करें या अपनी शक्तिपीठ यात्रा पर चलते रहें।
उन्होने बस से नवद्वीप जाने का निर्णय किया।

मंगल चण्डी शक्तिपीठ, उजानी


“भईया, जो पीढ़ी दर पीढ़ी संस्कारी होता है, उसमें सरलता होती है। अहंकार नहीं होता। ये पुजारी जी भी वैसे ही हैं। उनसे मिल कर अच्छा लगा।” – प्रेमसागर ने कहा। शाम की आरती के लिये पुजारी जी ने उन्हें बुलाया भी है।

दो शक्तिपीठ – फुल्लारा देवी और कंकालिताला देवी दर्शन


स्थान को “कंकाली” कहा जाता है। कंकाल अर्थात शरीर का अस्थि-ढांचा। […]दिल्ली की मुगलिया सरकार के सेनापति काला पहाड़ (जो धर्म परिवर्तन के पहले राजीबलोचन राय था) ने जगन्नाथ पुरी, कामाख्या और कंकालीताला को क्षतिग्रस्त किया था।

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free