खाड़ी जंग से बदलता गांवदेहात


गांवदेहात डायरी साइकिल लेकर निकलता हूं तो हर जगह कुछ बदलाव नजर आता है। विक्रमपुर की हाइवे से संधि पर दोनों ओर दो गुमटियां हैं—जग्गी की आलू टिक्की और राजेश की समोसा बेचने वाली। दस दिन से दोनों बंद हैं। दोनों गैस पर चलाते थे अपनी दुकान। अब मेरे लिये यह समाजशास्त्रीय अध्ययन होगा—देखना किContinue reading “खाड़ी जंग से बदलता गांवदेहात”

हमारे घर का सेंगोल — राजदंड


गांवदेहात डायरी पोर्टिको में चाय-अनुष्ठान का चरित्र अब पक्षियों की संख्या और उनकी प्रजातियों की विविधता के साथ बदल गया है। अब कौए बढ़ गये हैं—पहले आठ-दस हुआ करते थे, अब दो दर्जन या उससे भी अधिक। मुंडेर या ऊँची जगहों पर बैठे वे पोर्टिको की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। फीकी नमकीन का डिब्बाContinue reading “हमारे घर का सेंगोल — राजदंड”

सवेरे की साइकिल सैर का मजा


गांवदेहात डायरी सवेरे सवा सात बजे घर से निकलता हूं बिजली की साइकिल पर। तापक्रम 28 डिग्री के आसपास और हवा भी (अपेक्षाकृत) साफ। घूमने का मजा ऐसे ही मौसम में है। यातायात कम होता है। हाईवे की सर्विस लेन पर चारपहिया वाहन लगभग नहीं के बराबर। ज्यादातर लोग साइकिल पर अपने छोटे बर्तन मेंContinue reading “सवेरे की साइकिल सैर का मजा”

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