किस्सा पांडे सीताराम सूबेदार और मधुकर उपाध्याय


बहुत पहले जब बीबीसी सुना करता था, मधुकर उपाध्याय अत्यंत प्रिय आवाज हुआ करती थी. फिर उनकी किताब किस्सा पांडे सीताराम सूबेदार की समीक्षा वर्ष २००० मे रतलाम में पढी। समीक्षा इतनी रोचक लगी कि वह पुस्तक दिल्ली से फ्रंटियर मेल के कंडक्टर से मंगवाई। पहले बात मधुकर जी की कर ली जाये। मधुकर जीContinue reading “किस्सा पांडे सीताराम सूबेदार और मधुकर उपाध्याय”