कंटिया भाग दो: कंटिये में तो हम ही फंस गये हैं.


कल की पोस्ट पर एक दूसरे मिसिर जी ने जो गुगली फैंकी; उससे लगता है कि कंटिये में हम खुद फंस गये हैं. छोटे भाई शिव कुमार मिश्र ने जो रोमनागरी में टिप्पणी दी है पहले मैं उसे देवनागरी में प्रस्तुत कर दूं: “सिस्टम भ्रष्ट है…” और तब तक रहेगा जब तक मिसिराइन अपने कोContinue reading “कंटिया भाग दो: कंटिये में तो हम ही फंस गये हैं.”