अभी कहां आराम बदा…


पश्चिम रेलवे के रतलाम मण्डल के स्टेशनों पर रॉबर्ट फ्रॉस्ट की कविता का हिन्दी अनुवाद टंगा रहता था। यह पंक्तियां नेहरू जी को अत्यन्त प्रिय थीं: गहन सघन मनमोहक वन, तरु मुझको याद दिलाते हैं किन्तु किये जो वादे मैने याद मुझे आ जाते हैं अभी   कहाँ आराम बदा यह मूक निमंत्रण छलना हैContinue reading “अभी कहां आराम बदा…”