दीन दयाल बिरद सम्भारी – पुन: दृष्टि


एक साल गुजर गया। मैने पहली पोस्ट लिखी थी इस ब्लॉग पर २३ फरवरी’२००७ को। एक अनगढ़ पोस्ट – दीनदयाल बिरद सम्भारी। आज उसे देखता हूं तो लगता है बहुत पानी बह गया है गंगा में। लिखने का तरीका, फॉण्ट का प्रयोग, प्रेजेण्टेन और वैचारिक परिपक्वता – सब में अन्तर है। भाषा में प्रवाह पहलेContinue reading “दीन दयाल बिरद सम्भारी – पुन: दृष्टि”