दिहाड़ी मजदूर


सवेरे साढ़े नौ बजे दफ्तर के लिये निकलता हूं तो फाफामऊ जाने वाली रेल लाइन के पास अण्डरब्रिज के समीप सौ-डेढ़ सौ दिहाड़ी मजदूर इंतजार करते दीखते हैं। यह दृष्य बहुत से शहरों में लेबर चौराहों या मुख्य सड़क के आसपास दीखता है। राज-मिस्त्री, बिजली का काम जानने वाले, घर की पुताई करने वाले याContinue reading “दिहाड़ी मजदूर”