सर्दी कम, सब्जी कम


अर्जुन प्रसाद पटेल अपनी मड़ई पर नहीं थे। पिछली उस पोस्ट में मैने लिखा था कि वे सब्जियों की क्यारियां बनाते-रखवाली करते दिन में भी वहीं कछार में होते हैं और रात में भी। उनका न होना मुझे सामान्य न लगा। एक लड़की दसनी बिछा कर धूप में लेटी थी। बोली – बाबू काम परContinue reading “सर्दी कम, सब्जी कम”