डोमिनगढ़


किसी स्थान के बारे में मैं अगर सोचूं कि अनूठे कोण से लिख सकता हूं, तो वह गंगा के कछार के अलावा सम्भव नहीं। वहां मेरे साथ कोई सरकारी अमला नहीं होता था। ज्यादातर मैं कुरता पायजामा में होता था। या फ़िर जींस का पैण्ट। वहां के केवट, सब्जी उगाने वाले, मछेरे, ऊंट वाले याContinue reading “डोमिनगढ़”

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