लालती और पिताजी

पिताजी को तेइस दिन हो गए अस्पताल में. संक्रमण और वृद्धावस्था में डिमेंशिया के कारण अशक्तता उन्हें भ्रमित और लगभग कोमा जैसी दशा में होने को बाध्य करती है. कभी कभी वे “होश” में आते हैं. अन्यथा, बकौल डाक्टर साहब, उनका Glasgow Coma Score 9 के आसपास है. सामन्य व्यक्ति का 15 होता है.

आज सवेरे जब मैंने उन्हें फ़ीड दी (Ryle Tube से) तो पास में लालती खड़ी थी. लालती लिनेन बदलती है. वह पास के गांव में रहती है और अस्पताल की कर्मचारी है. उसके बारे में मैंने पिछले महीने फेसबुक पेज पर भी कुछ लिखा था.

लालती उनसे हालचाल पूछने लगी. छोटी छोटी बातें. आत्मीयता और लाड से संतृप्त…. और पिताजी आश्चर्य जनक रूप से उससे बात करने लगे. दो चार शब्द बोल कर.

इमर्जेंसी वार्ड के कर्मियों ने बताया कि रात में भी वे बेहतर रिस्पॉन्स दे रहे थे.

डिमेंशिया का मरीज मानसिक रूप से बादलों पर रहता है. उनकी तरह डूबता उतरता है. पिताजी भी वैसे ही हैं.

अगर वे अधिकांश समय चेतन रह सकें तो कितना अच्छा हो.

मैंने उनसे बात करने की कोशिश की. पर मुझसे ज्यादा नहीं बोले. लगा कि शायद वे इमोशनल हो जा रहे थे. उनकी आँखों से लगा कि वे बहुत कुछ सम्प्रेषण करना चाहते हैं. धीरे-धीरे वे थक गए और सोने लगे.

यही कुछ क्षण हैं जो याद रहेंगे. अन्यथा वे कितना रिकवर करेंगे, कहा नहीं जा सकता.

लालती और पिताजी

लालती पर 6 सितंबर 2019 को फेसबुक पर यह लिखा था –

यह लालती है. #SuryaTraumaCenter, Aurai में लिनेन धोती, प्रेस करती और कमरों में देती, बिछाती है. बताया कि ठीक से मिलता है मेहनताना. काम के हिसाब से प्रसन्न है वह. यूँ कहती हैं कि काम बहुत है.
यह अस्पताल खुलने पर उसके जैसी छ महिलाओं को काम मिला है. धोबी, दाई और सफाई के काम के लिए.
हर रोज करीब 25 – 30 सेट लिनेन बदला जाता है. अर्थात उतने मरीज तो डील कर ही रहा है यह 50 बेड का अस्पताल. शुरुआती आक्यूपेंसी 50-60 प्रतिशत अच्छी ही कही जाएगी अस्पताल के लिए. वह भी इस इलाके में जहां पे करने की क्षमता कम है लोगों की.
लालती का पति पैर से लाचार है. अतः उसे यह नौकरी मिलना बड़ा मायने रखता है. वह अकेले कमाती है. घर में पति और बच्चों के अलावा बूढ़ी सास हैं. सब उसके जिम्मे.
लड़के को बारहवीं के साथ कम्प्यूटर सिखा रही है. और कुछ नहीं तो मोबाइल की दुकान खोल लेगा. कपड़े प्रेस तो कर ही लेता है खाली समय में.
आप अगर आसपास देखें तो बहुत सी जद्दोजहद की और सफलता की स्टोरीज मिलेंगी. #गांवदेहात में भी.


Published by Gyan Dutt Pandey

Exploring rural India with a curious lens and a calm heart. Once managed Indian Railways operations — now I study the rhythm of a village by the Ganges. Reverse-migrated to Vikrampur (Katka), Bhadohi, Uttar Pradesh. Writing at - gyandutt.com — reflections from a life “Beyond Seventy”. FB / Instagram / X : @gyandutt | FB Page : @gyanfb

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