लालती और पिताजी


यही कुछ क्षण हैं जो याद रहेंगे. अन्यथा वे कितना रिकवर करेंगे, कहा नहीं जा सकता.

आत्माराम तिवारी की अस्पताल के एमरजेंसी वार्ड में उड़द और गाय की चिंता


अशक्त, कूल्हे की हड्डी जोड़ने का ऑपरेशन कराए एमरजेंसी वार्ड में लेटे चौरासी वर्षीय पंडित आत्माराम तिवारी का मन गांव देहात, घर, उड़द और गाय में घूम रहा है. उन्हें एक बंधुआ श्रोता चाहिए पर लोग पगहा छुड़ा भागते हैं.