राजधर – साइकिल पर सब्जी

दो किलोमीटर दूर गांव है राजधर का। करहर। साइकिल पर सब्जी ले कर निकलते हैं और करहर, भगवानपुर, विक्रमपुर, मेदिनीपुर, कोलाहलपुर और द्वारिकापुर होते हुये करहर वापस लौटते हैं। करीव 8-10 किलोमीटर की साइकिल-फेरी लगाते हैं। आज शाम चार बजे उन्हें मैंने पहली बार देखा। नौजवान आदमी। शायद साल दो साल पहले लड़का ही रहा हो।

“रोज आता था, कोई बाहर मिलता नहीं था तो चला जाता था।”; उन्होने कहा।

दो महीना पहले तमिलनाडु से गांव लौटे थे राजधर। वहां कोयम्बटूर में किसी धागा बनाने वाली कम्पनी में कारीगर थे। अभी वापस जाने की नहीं सोची है। “कम से कम चार-पांच महीने तो यहीं रहना है।”

मैंने पूछा नहींं कि वहां फैटरी चालू हुई या नहीं। शायद वहां काम में अभी भी अवरोध हो; या शायद कोरोना संक्रमण का मामला हो। कोयम्बटूर की बजाय करहर में हालात कोरोना संक्रमण के हिसाब से ज्यादा सुरक्षित तो है ही।

राजधर, सब्जीवाले

पर मुझे नहीं लगता कि संक्रमण का कोण है राजधर के निर्णय में। तीन थैले आगे और एक बास्केट पीछे रख साइकिल पर घर घर घूमते राजधर ने कोई मास्क नहीं लगा रखा। कोविड-19 संक्रमण से बचाव उनके लिये प्रमुख मुद्दा हो, ऐसा लगता नहीं। जीविकोपार्जन ज्यादा महत्व रखता होगा।

राजधर को जल्दी थी। आज सब्जी ले कर निकलने में देर हो गयी। बोले – “अब तक तो द्वारिकापुर पंहुचता था। लगता है देर होने के कारण आज पूरी सब्जी बिक नहीं पायेगी।”

संक्रमण बहुत तेजी से बढ़ रहा है। पूर्वांचल में उसके बढ़ने की रफ्तार पहले पूरे उत्तर प्रदेश से कम हुआ करती थी, अब ज्यादा हो गयी है। उत्तर प्रदेश पहले भारत के औसत से बढ़त में नीचे रहता था, अब उसमें देश से ज्यादा तेजी से नये मामले बढ़ रहे हैं। और खराब बात यह है कि ठीक होने की दर, बढ़ने की दर से कम हो गयी है। लोग ज्यादा बीमार हैं। पहले कुल मामलों के 25% लोग ही कोरोना पॉजिटिव हुआ करते थे; अब पूर्वांचल में कुल पाये गये मामलों के 40+% पॉजिटिव हैं।

संक्रमण की विकट दशा में राजधर जैसे व्यक्ति का सब्जी घर घर पंहुचाना बड़े महत्व का काम है, समाज के लिये। पता नहीं, वे इसको समझते हैं या नहीं। उनसे किसी ने इसके बारे में बोला भी है या नहीं।

फिलहाल, राजधर को जाने की जल्दी थी; मैंने उनसे रोज आने को कहा। शायद वे कल आयें।


Published by Gyan Dutt Pandey

Exploring rural India with a curious lens and a calm heart. Once managed Indian Railways operations — now I study the rhythm of a village by the Ganges. Reverse-migrated to Vikrampur (Katka), Bhadohi, Uttar Pradesh. Writing at - gyandutt.com — reflections from a life “Beyond Seventy”. FB / Instagram / X : @gyandutt | FB Page : @gyanfb

3 thoughts on “राजधर – साइकिल पर सब्जी

  1. रोचक पोस्ट। शहर के बजाय अभी अपने गाँव या कस्बे में रहना ही बेहतर है। इधर खतरा तो कम है ही साथ में घर वालो के साथ रहने से इस समय व्यक्ति को मानसिक संबल भी मिलता है। आज जिस तरह की आर्थिक परेशानियों से लोग गुजर रहे हैं उसमें यह संबल काफी बड़ी बात है। दूसरे शहर में अपने लोगों से दूर व्यक्ति के अवसाद में जाने की ज्यादा सम्भावना है।

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