इस गांव में भारत की अर्थव्यवस्था में ब्रेक लगे दिखते हैं


कुल मिला कर एक सवारी गाड़ी का रेक और चार बसें यहां मेरे घर के बगल में स्टेबल हैं। … यानी अर्थव्यवस्था को ब्रेक लग चुके हैं और उसे देखने के लिये मुझे अपने आसपास से ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ रहा।

10 साल पहले – मोटल्ले लोगों की दुनियाँ


दुनियाँ मुटा रही है। मुटापे की विश्वमारी फैली है। लोग पैदल/साइकल से नहीं चल रहे। हमारा शरीर मुटापे से लड़ने के लिये नहीं, भुखमरी से लड़ने के लिये अभ्यस्त है। समाज भी मुटापे को गलत नहीं मानता। लम्बोदर हमारे प्रिय देव हैं!

राजधर – साइकिल पर सब्जी


दो महीना पहले तमिलनाडु से गांव लौटे थे राजधर। वहां कोयम्बटूर में किसी धागा बनाने वाली कम्पनी में कारीगर थे। अभी वापस जाने की नहीं सोची है। “कम से कम चार-पांच महीने तो यहीं रहना है।”

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