सवेरे की चाय पर टुन्नू (शैलेंद्र) पण्डित


टुन्नू पण्डित – शैलेंद्र दुबे – मेरे साले साहब हैं। उन्हीं के चक्कर में पड़ कर हम गांव में अपना घरबार शिफ्टिया लिये रिटायरमेण्ट के बाद। कभी कभी सवेरे की चाय पर आ जाते हैं। वह बहुत कम होता है – ज्यादातर उनके चेला लोग सवेरे से उन्हें घेर लेते हैं। आजकल जिल्ला भाजपा केContinue reading “सवेरे की चाय पर टुन्नू (शैलेंद्र) पण्डित”

प्रेमसागर जी को लह गया नया स्मार्टफोन!


आज नया स्मार्टफोन मिल जाने से उनकी नोकिया के बूढ़े, चार इंच के स्मार्ट(?) फोन के धुंधले चित्र से निजात मिली। उन चित्रों को मुझे बहुत एडिट करना पड़ता था और तब भी धुंधलापन दूर न होने के कारण उनका पेण्टिंग टाइप संस्करण बनाना होता था। अब वह नहीं करना होगा।

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