तीन तालियों पर मेरी पत्नीजी के विचार


सुटकहवा (पतला दुबला) तो बाकी दो हैवीवेट वालों को सम्भालने में ही हैरान परेशान दिखता है। है वो पढ़ा लिखा। चण्ट भी है। दोनो बाकी लोगों के दबाव में नहीं दिखता। पर उसका रोल जैसा है, उसके हिसाब से उसे बैलेंस बनाना पड़ता है।

अमरकण्टक से अकेले ही चले कांवर लेकर प्रेमसागर


लोग बद्री-केदार-गया की यात्रा पर निकलते हैं तो लोग गाजे-बाजे के साथ उनका जयकारा लगा विदा करते हैं। … पर यहां प्रेमसागर निकले हैं इतनी बड़ी द्वादश ज्योतिर्लिंग की पैदल यात्रा पर निपट अकेले!

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