कुल बीस मिनट लगते हैं उसे मेरे जोड़ों की मालिश करने में। इस दौरान मैं सामान्यत: टैब पर कोई लेख या अख़बार का सम्पादकीय सुनता रहता हूं। आज टैब पास नहीं था और वह आ गया।
मेरे पास समय था और उसके हाथ, यद्यपि व्यस्त थे, पर बात-चीत तो वह कर ही सकता था। मैंने पूछना शुरू किया। शुरुआत रेलवे स्टेशन से की।
स्टेशन मास्टर बदल गये हैं। कोई बिहारी नौजवान आया है। शायद ज्यादा दिन न रुके। आजकल लोग स्टेशन की कॉलोनी में रहने की बजाय शहर रह कर मोटर साइकिल से रोज़ आना-जाना बेहतर समझते हैं। सड़कों और हाईवे ने दूरी छोटी कर दी है। स्टेशन के पुराने मकानों में अब शायद आदमी कम, कीड़े-मकोड़े और सांप ज्यादा रहते होंगे।
“नया मास्साब गांव के बड़े लोगों से मिलने-जुलने जाता है?” — मैंने पूछा।
वह हल्का हंसा। “वह जमाना चला गया। तब रेलवे वाले गांव पर निर्भर रहते थे। अब गांव वाले रेलवे पर निर्भर हैं।”
सच ही तो है। प्लेटफार्म गांव का बैकयार्ड बन गया है। कोई वहां सोता है, कोई बच्चों को खेलने छोड़ देता है, कोई शाम की सैर करता है। गांव रेलवे का उपयोग भी करता है, अतिक्रमण भी। और मेरे भीतर का पुराना रेलवे अफसर अब भी कभी-कभी फुंफकार उठता है।
मैंने गांव के लोगों का हाल पूछना शुरू किया — “फलाने कैसे हैं? सुना था खटिया पकड़ लिये थे।”

“नाहीं, अब ठीक नहीं होंगे। जब से खेत बेचे हैं, तबियत गिरती गई। आदमी खेत बेच दे तो भीतर भीतर टूट जाता है। वैसा ही हुआ है उनके साथ।”
फिर वह गांव के बूढ़ों का ब्यौरा देने लगा। “जेकर देखअ, गोड़-घुटना पकड़ लिहे बा। कोई एक लाठी लेके चलता है, कोई दुनो हाथ में।” किसी की टांग सूज गई है, किसी की कमर झुक गई है। वह हाथों से सूजन का आकार भी बता देता है।
“भगत जी कथा कहते हैं अभी?”
“रोजन्ना। तीस-पैंतीस गदेला इकट्ठा हो जाते हैं।”
“सुनने?”
“नाहीं, प्रसाद खातिर। रोज लाची-दाना बंटता है। अब कह रहे हैं पेड़ा बांटिये।”
उसने आसपास के लगभग तीन दर्जन बच्चों के नाम भी गिना दिये जो कथा से ज्यादा प्रसाद के लालच में नियमित श्रोता हैं। बच्चों के अलावा उम्रदराज — जिनको जरूरत है कथा श्रवण की — वे कन्नी काटते हैं।
अच्छा ही है। लाची-दाना या पेड़े की आशा में बच्चों को ही सही, कुछ रामायण-पुराण कान में पड़ जाता होगा।
उसका काम खत्म हो गया था। मेरे पास सप्लीमेंट्री प्रश्न अभी बहुत थे। पर अब उसे गमलों में पानी डालना था, आंधी से टूटी डालियां भी शायद छांटनी थीं। काम इंतजार नहीं कर सकता; मेरे प्रश्न कर सकते हैं।
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