घर के सामने की दांये कोने पर कम ही जाता हूं। वहां गूलर, नीम और पीपल के तीन पेड़ हैं। त्रिदेव की तरह। वहां रामसेवक घर की किचन गार्डनिंग करते हैं। एक कोने में दुमुही – सैंडबोआ और धामिन – असाढ़िया चूहे खाने वाले सांप की भी उपस्थिति है। कभी कभी तीतर भी अपना परिवारContinue reading “घर के बगीचे के कोने की दुनियाँ”
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
संहजन की फलियां सुखाई जा रही हैं
हमारे घर में संहजन नहीं है। एक लगाया था पर उसकी पत्तियां और फलियाँ कड़वी होती थीं। सो उसे हटा दिया। उसकी जगह कोई और फलदार पौधा लगा है। सुभाष जी को मालुम था कि हमारे यहां संहजन नहीं है। तो उन्होने ढेर सारी फलियाँ भेज दीं। काफी तो हमने दाल में उबाल कर चूसContinue reading “संहजन की फलियां सुखाई जा रही हैं”
दो साइकिलों की कहानी
बटोही ने पहले गाँव-देहात दिखाया। दस किलोमीटर की परिधि में — शरबतखानी से जगतानंद धाम, पचेवरा से गिर्दबड़गांव — सब उसके साथ नापा। वह अब भी नाप सकती है। पर मेरे घुटने अब उतनी मेहनत की इजाज़त नहीं देते। इसीलिये ईबटोही आई। बटोही अब दूसरे रोल में है। रोज़ चालीस-साठ मिनट घर-परिसर में गोल-गोल चक्कर।Continue reading “दो साइकिलों की कहानी”
