गुन्नीलाल जी के यहाँ से लौट रहा था। सवेरे साढ़े आठ का समय। धूप अभी तीखी नहीं हुई थी। सामने एक आदमी साइकिल पर था — सिर पर गमछे का फेंटा बाँधे, पीठ सीधी, पीछे कैरियर में टिफिन दबाया हुआ। चाल में जल्दी थी, पर थकान भी। मैंने बिजली की साइकिल तेज़ की और बगलContinue reading “कालीन का कारीगर”
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
सिब्बू गुरू की बारात
आज साइकिल गुन्नीलाल जी के यहाँ मुड़ गई। ग्वाले के यहाँ से वे दूध ले कर आ चुके थे। नीम की छाँव में अपना मोबाइल स्क्रॉल कर रहे थे। मुझे देख कर उठे, स्वागत किया। नीम के नीचे ही कुर्सी और टेबल लाये — धूल साफ कर बिठाया। तब बातचीत शुरू हुई। बोले — साहेब,Continue reading “सिब्बू गुरू की बारात”
घड़ी, साइकिल, बाजा बनाम राइडर
मेरे बचपन में दहेज का मानक था — घड़ी, साइकिल और बाजा – रेडियो। तेल से चुआती जुल्फी टेये नई शादी वाला दुलहा गांव में साइकिल ले कर घड़ी पहने और रेडियो पर बिनाका गीत माला सुनता निकलता था। जलवा होता था। अब समय बहुत बदल गया है। बगल में शादी तय हुई है। छेकईयाContinue reading “घड़ी, साइकिल, बाजा बनाम राइडर”
