नर्मदा दंड परिक्रमा : अध्याय 1


बलिया पेसेंजर से बरगी के ड्रेगन तक अप्रेल 2026 — यात्रा का पहला महीना यात्रा का प्रारम्भ — कटका स्टेशन — पैसेंजर ट्रेन में गुजरते प्रेमसागर सवेरे फोन आया तो प्रेमसागर की ट्रेन बनारस सिटी में खड़ी थी। उन्होंने बताया कि वे प्रयाग जा रहे हैं, वहाँ से चित्रकूट जाएंगे। किसी चंदन की लकड़ी काContinue reading “नर्मदा दंड परिक्रमा : अध्याय 1”

कालीन का कारीगर


गुन्नीलाल जी के यहाँ से लौट रहा था। सवेरे साढ़े आठ का समय। धूप अभी तीखी नहीं हुई थी। सामने एक आदमी साइकिल पर था — सिर पर गमछे का फेंटा बाँधे, पीठ सीधी, पीछे कैरियर में टिफिन दबाया हुआ। चाल में जल्दी थी, पर थकान भी। मैंने बिजली की साइकिल तेज़ की और बगलContinue reading “कालीन का कारीगर”

सिब्बू गुरू की बारात


आज साइकिल गुन्नीलाल जी के यहाँ मुड़ गई। ग्वाले के यहाँ से वे दूध ले कर आ चुके थे। नीम की छाँव में अपना मोबाइल स्क्रॉल कर रहे थे। मुझे देख कर उठे, स्वागत किया। नीम के नीचे ही कुर्सी और टेबल लाये — धूल साफ कर बिठाया। तब बातचीत शुरू हुई। बोले — साहेब,Continue reading “सिब्बू गुरू की बारात”

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