कुछ परिस्थितियाँ बदली नहीं जातीं। उनमें अपने मन को बदला जाता है। एक औरत धान की नर्सरी से पौधे उखाड़कर उनके छोटे-छोटे गट्ठर बना रही थी। इधर उसे बेहन कहते हैं। दो छोटे बच्चे भी उसके साथ थे। वे पौधे समेटते, गट्ठर पकड़ाते और बीच-बीच में पानी में छपाछप भी कर लेते। नर्सरी में इतनाContinue reading “बेहन, बारिश और एक बंद छाता”
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
मधुमेह के युग में शहद ज़रूरी है क्या?
शहद खरीदने गया था, लौटते समय अपने विश्वासों की भी जाँच साथ ले आया। कल मैं स्थानीय मधुमक्खी पालक विकास पांडे के यहाँ से तीन किलो शहद लेकर लौटा। कीमत थी ₹400 प्रति किलो। चार-पाँच वर्ष पहले जब उनसे शहद लेना शुरू किया था, तब यही शहद ₹305 प्रति किलो मिलता था। कीमत बढ़ी तोContinue reading “मधुमेह के युग में शहद ज़रूरी है क्या?”
धान की रोपाई की रहचह
रात भर बारिश होती रही। अब तक इस मौसम में मानसून करीब अस्सी प्रतिशत कमजोर रहा था, इसलिए यह बारिश किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आई। सुबह तक पानी थम चुका था और साइकिल लेकर निकलने का मौसम बन गया था। कमीज़ की जेब में नोकिया का चुटपुटिया मोबाइल रखा और मैं निकल पड़ा।Continue reading “धान की रोपाई की रहचह”
