हमारे पास एक डेढ़ घण्टे का समय था और एक वाहन। सड़क पर घूमते हुये रतलाम का नौ वर्ष बाद का अहसास लेना था। आसान काम नहीं था – जहां चौदह-पन्द्रह साल तक पैदल अनन्त कदम चले हों वहां वाहन में डेढ़ घण्टे से अनुभूति लेना कोई खास मायने नहीं रखता। पर जैसे पकते चावलContinue reading “रतलाम की सड़क पर”
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
कारू मामा की कचौरी
कल सवेरे मंसूर अली हाशमी जी रतलाम स्टेशन पर मिलने आये थे, तो स्नेह के साथ लाये थे मिठाई, नमकीन और रतलाम की कचौरियां। मैं अपनी दवाइयों के प्रभाव के कारण उदर की समस्या से पीड़ित था, अत: वह सब खोल कर न देखा। शाम के समय जब विष्णु बैरागी जी मिले तो उन्होने अपनेContinue reading “कारू मामा की कचौरी”
प्रयाग फाटक का मोची
मैं उससे मिला नहीं हूं। पर अपने दफ्तर आते जाते नित्य उसे देखता हूं। प्रयाग स्टेशन से जब ट्रेन छूटती है तो इस फाटक से गुजर कर फाफामऊ जाती है। फाटक की इमारत से सटी जमीन पर चबूतरा बना कर वह बैठता है। सवेरे जाते समय कई बार वह नहीं बैठा होता है। शाम कोContinue reading “प्रयाग फाटक का मोची”
