कन्दमूल-फल, चिलम और गांजा


वह लड़का बारह-तेरह साल का रहा होगा। एक जैकेट और रफू की गई जींस का पैण्ट पहने था। माघ मेला क्षेत्र में संगम के पास सड़क के किनारे अखबार बिछा कर बैठा था। खुद के बैठने के लिये अखबार पर अपना गमछा बिछाये था। वह कन्दमूल फल बेच रहा था। सफेद रंग की विशालकय जड़ काContinue reading “कन्दमूल-फल, चिलम और गांजा”

नत्तू पांड़े और प्रसन्नता


मेरी बिटिया और मेरा नाती विवस्वान (नत्तू पांड़े) यहां हमारे पास एक महीना रहे। वह महीना भर प्रसन्नता का दौर रहा। मेरी पत्नीजी को सामान्य से कहीं अधिक काम करना पड़ता था, पर मुझे कभी यह नहीं लगा कि वह उनको बोझ लग रहा था। मेरी बिटिया ने मेरे लड़के को उसके कमरे से बेदखलContinue reading “नत्तू पांड़े और प्रसन्नता”

महिषासुर


काफी समय हुआ जब देखा था कि विसर्जित देवी प्रतिमा का एक अंश गंगा नदी के किनारे पड़ा था। विसर्जन में यह धारा में बह नहीं पाया था। और घाट पर मारा मारा फिर रहा था। अनुमान था कि इसका उपयोग जवाहिरलाल कभी न अभी अलाव जलाने में कर लेगा। पर वैसा हुआ नहीं। कछारContinue reading “महिषासुर”

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