एक समय था, जब शहरों में चिड़ियां और कौव्वे बहुतायत से थे और चौराहे पर लगी मूर्तियां उनकी बीट से गंदी हुआ करती थीं। अन्यथा उनको इज्जत बक्शी जाती थी। अब चिड़ियां कव्वे गायब हो गये हैं। सो बीट की समस्या कम हो गई है। पर इज्जत-फिज्जत भी गायब हो गई है। उसका स्थान लेContinue reading “जकड़े हुये राणा प्रताप”
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
डिसऑनेस्टतम समय – क्या कर सकते हैं हम?
तरुण जी ने पिछली पोस्ट (डिसऑनेस्टतम समय) पर टिप्पणी मेँ कहा था: Edmund Burke का एक अंग्रेजी quote दूंगा: “The only thing necessary for the triumph of evil is for good people to do nothing.” समाज की इस दशा के लिए कोई और नहीं हम खुद ही जिम्मेदार है खासकर पिछली पीढ़िया। इसे ठीक भीContinue reading “डिसऑनेस्टतम समय – क्या कर सकते हैं हम?”
नत्तू पांड़े स्काइप पर
नत्तू पांड़े अब हफ्ते में दो दिन स्काइप के माध्यम से मिलते हैं। उनके पापा (विवेक पाण्डेय) रात में लौटते हैं कामकाज से निपट कर। तब वे पन्द्रह-बीस मिनट के लिये नत्तू को ऑनलाइन कराते हैं। शुरू में वीडियो – बातचीत नत्तू पांड़े को अटपटी लगती थी; पर अब माहिर हो चले हैं नत्तू इसContinue reading “नत्तू पांड़े स्काइप पर”
