शिवकुटी में गंगा तीर पर सिसोदिया की एक पुरानी कोठी है। उसमें चलता है एक संस्कृत विद्यालय। छोटे-बड़े सब तरह के बालक सिर घुटा कर लम्बी और मोटी शिखा रखे दीखते हैं वहां। यहां के सेमी-अर्बन/कस्बाई माहौल से कुछ अलग विशिष्टता लिये। उनके विद्यालय से लगभग 100 मीटर दूर हनूमान जी के मन्दिर के पासContinue reading “बाल पण्डितों का श्रम”
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
मेरा व्यवसाय – जी. विश्वनाथ का अपडेट
यह श्री गोपालकृष्ण विश्वनाथ की अतिथि पोस्ट है: बहुत दिनों के बाद हिन्दी ब्लॉग जगत में फिर प्रवेश कर रहा हूँ। करीब दो साल पहले आपने (अर्थात ज्ञानदत्त पाण्डेय ने) मेरी अतिथि पोस्ट छापी थीं। विषय था – “जी विश्वनाथ: मंदी का मेरे व्यवसाय पर प्रभाव“। अब पेश है उस सन्दर्भ में एक “अपडेट”। दोContinue reading “मेरा व्यवसाय – जी. विश्वनाथ का अपडेट”
एक अधकचरा इण्टरव्यू
मानसिक हलचल ने ज्ञानदत्त पाण्डेय का यह इण्टरव्यू लिया है। बहुत कुछ वैसे कि अखबार के मालिक का इण्टरव्यू छापने को सम्पादक बाध्य होता है; मैं ब्लॉग मालिक का यह इण्टरव्यू छाप रहा हूं। माह [मानसिक हलचल] – पांड़े जी, आप साहित्य के नाम से नाक भौं सिकोड़ते हैं। क्या बतायेंगे कि आप ऐसा क्योंContinue reading “एक अधकचरा इण्टरव्यू”
