डिसऑनेस्टतम समय


सुना है कि यह भारत में डिसऑनेस्टतम समय है। कभी कहा जाता था कि भारत को चंगेज खान ने लूटा, तैमूर लंग ने लूटा, अब्दाली ने लूटा, अंग्रेजों ने लूटा। अब लूटने का नम्बर भारतीय लूट-एलीट का है। आये दिन नये नये नाम आ रहे हैं। इनके सामने चंगेज/तैमूर/अब्दाली/अंग्रेज पिद्दी नजर आते हैं। मुंह पिटाऊ।Continue reading “डिसऑनेस्टतम समय”

बनिया (प्रोप्राइटरी) ऑर्गेनाइजेशन


संजीव तिवारी कहते हैं कि उनके बनिया ऑर्गेनाइजेशन में अगर “हम अपनी गर्दन खुद काटकर मालिक के सामने तश्‍तरी में पेश करें तो मालिक कहेगा, यार … थोड़ा तिरछा कटा है, तुम्‍हें गर्दन सीधा काटना नहीं आता क्‍या ???” बनिया (प्रोप्राइटरी) ओर्गेनाइजेशन, बावजूद इसके कि उनके सीईओ ढ़ेरों मैनेजमेण्ट की पुस्तकें फ्लेश करते हैं अपनेContinue reading “बनिया (प्रोप्राइटरी) ऑर्गेनाइजेशन”

बुढ़िया चपरासी – द्रौपदी और मेरी आजी


पिछली पोस्ट में मैने अपने दफ्तर की एक बुढ़िया चपरासी के बारे में लिखा था। आप लोगों ने कहा था कि मैं उससे बात कर देखूं। मैने अपनी झिझक दूर कर ही ली। कॉरीडोर में उसको रोक उसका नाम पूछा। उसे अपेक्षा नहीं थी कि मैं उससे बात करूंगा। मैं सहज हुआ, वह असहज होContinue reading “बुढ़िया चपरासी – द्रौपदी और मेरी आजी”

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