वाह, अजय शंकर पाण्डे!


गाजियाबाद म्यूनिसिपल कर्पोरेशन ने उत्कोच को नियम बद्ध कर म्युनिसिपालिटी का आमदनी बढ़ाने का जरीया बना दिया है. यह आज के टाइम्स ऑफ इण्डिया में छपा है. टाइम्स ऑफ इण्डिया मेरे घर आता नहीं. आज गलती से आ गया. पर यह समाचार पढ़ कर अजीब भी लगा, प्रसन्नता भी हुई और भ्रष्टाचार खतम करने कीContinue reading “वाह, अजय शंकर पाण्डे!”

घर बैठो; तनख्वाह पाओ!


बजाज आटो के 2200 कर्मचारी बैठे ठाले (सीएनएन मनी के अनुसार) अपने रिटायरमेण्ट तक घर बैठेंगे और तनख्वाह पायेंगे. आलोक पुराणिक (अ.ब.) के लिये पक्का मसाला है पोस्ट का. वे कह सकते हैं कि इसमें क्या बात है – सरकारी कर्मचारी तो नौकरी शुरू करते से रिटायरमेण्ट के दिन माला पहनने तक बिना काम केContinue reading “घर बैठो; तनख्वाह पाओ!”

खुक-खुक हंसती लड़की…..


एक बेवजहखुक-खुक हंसती लड़की…एक समय से पहले ब्याहीनवयौवना कम, लड़की ज्यादाऔर जले मांस की सड़ान्ध केबीच में होता हैकेवल एक कनस्तर घासलेटऔर “दो घोड़े” ब्राण्ड दियासलाई कीएक तीली भर का अंतर—–अलसाये निरीह लगते समाज मेंउग आते हैंतेज दांतउसकी आंखें हो जाती हैं सुर्ख लालभयानक और वीभत्स!मैं सोते में भी डरता हूंनींद में भी टटोल लेताContinue reading “खुक-खुक हंसती लड़की…..”

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