मल्लन साहब – सीक्वेल मल्लन चाचा


समीर लाल जी ने कल मल्लन चाचा को अपने ब्लॉग पर ठेला – क्या आप मल्लन चाचा को जानते हैं? मल्लन एक ऐसे चरित्र का नाम है जो सामान्य से अलग हो. हमें लगा, ये क्या; अपन भी अनुगूंज स्टाइल में ठेल सकते हैं. मान लें आलोक (9+2=11) जी ने नया टॉपिक दिया है –Continue reading “मल्लन साहब – सीक्वेल मल्लन चाचा”

नेटवर्क मार्केटिंग का झमेला


एक सज्जन नेटवर्क मार्केटिंग के तहद घर पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कुकिंग सिस्टम का डिमॉंस्ट्रेशन कर के गये हैं. पूरे जादुई अन्दाज में. चार कप चाय बना कर बताई है. कूकर की प्लेट पर 500 रुपये का नोट रख कर बताया है कि कुकिंग सिस्टम की प्लेट गरम नहीं होती और नोट जलता नहीं. हाथ भी पीसीContinue reading “नेटवर्क मार्केटिंग का झमेला”

दोषदर्शिता से कौन अछूता है? – एक आत्मावलोकन


दम्भ, स्नॉबरी, रुक्षता, मीकनेस, लल्लुत्व, चिर्कुटई…. ये सभी दुर्गुण सभी वर्गों में विद्यमान हैं. असल में ये मानव मात्र के गुण (दुर्गुण) हैं. मैने “मीक, लल्लू, चिर्कुट और क्या?” लिखा. मैने ही कल “उच्च–मध्य वर्ग की अभद्र रुक्षता” लिखा. उच्च वर्ग के विषय में नहीं लिखा; इसका अर्थ यह नहीं कि वह वर्ग इन गुणोंContinue reading “दोषदर्शिता से कौन अछूता है? – एक आत्मावलोकन”

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