वृद्धावस्था जैसे जैसे हावी होगी, वैसे वैसे साइकिल पर घूमना, देखना, लिखना शायद संकुचित होता जाये। जब तक यह एक्रोबैटिक्स चल रही है, तब तक चलाने का पूरा मन है। जीवन का रस कस कर निचोड़ना है, जीडी!
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गंगा तट की सुनहरी शाम और सुरती शेयर का समाजवाद – कोविड19
सुरती, दारू की तरह बहुत सामाजिक टाइप की चीज है। अजनबी व्यक्ति भी सुरती फटकने वाले के पास खिंचा चला आता है। वह निसंकोच सुरती मांग लेता है और देने वाला सहर्ष देता भी है।
गाँव देहात और गंगा तट का एकांत
सुबह शाम सूरज की किरणें, गंगा नदी का बहाव, बबूल के झुरमुट और उनके झाड़ों पर उखमज (पतिंगे) वैसे ही हैं, जैसे थे। किसी आयरस-वायरस का कोई प्रभाव नहीं।
