वे इस समय नवरात्रि के कारण नहीं चल रहे। उनके गुरू जी दण्ड दे रहे हैं। दण्ड देने का अर्थ है लेट लेट कर कांवर यात्रा करना। गुरू जी के साथ ही वे दस लोग चल रहे हैं। गुरू जी आगे हैं। वे उनके अनुगामी हैं।
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स्कूल, पढ़ाई और महुआ
बच्चा स्कूल नहीं जाना चाहता। पिता मिस्त्री का काम करता है तो वह उसके साथ लेबराना करना चाहता है। “ईंट तो उठा ही सकता हूं। लेबराना (मिस्त्री का हेल्पर) करूंगा, तभी तो मिस्त्री बनूंगा।” – बच्चे को अपनी लाइन, अपना भविष्य बड़ा स्पष्ट है।
अभोली के रामेश्वर मिश्र
वह अपरिचित नौजवान मुझे घर के गेट पर मिल गये। मैं शाम के समय साइकिल ले कर निकलने ही वाला था कि उस व्यक्ति ने मेरे बारे में पूछा। कौन हैं, किस लिये मिलना चाहते हैं, यह पूछ्ने पर बड़ा आश्चर्यजनक (और सुखद) उत्तर था कि वे सलोरी, प्रयागराज में रह कर पीसीएस की परीक्षाContinue reading “अभोली के रामेश्वर मिश्र”
