<<< शिवकुमार झाड़ू लगाता है >>> वह देखने में जवान लगता है पर उसकी उम्र इतनी कम भी नहीं होगी। चालीस से पैंतालीस के बीच हो सकता है। इकहरा बदन है तो उम्र पता नहीं चलती। मेरी पत्नीजी को वह दीदी बोलता है। गांव में दो-तीन तरह के लोग हैं। एक तो मेरी पत्नीजी कोContinue reading “शिवकुमार झाड़ू लगाता है”
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बेलपत्र वाले विजयशंकर
<<< बेलपत्र वाले विजयशंकर >>> मेरे घर के बगल में ही रहता है बेलपत्र और दूब का कार्य करने वाला परिवार। आज सवेरे देखा विजयशंकर अपनी मॉपेड पर पानी से भीगे गट्ठर लाद रहा था। कुल आधा दर्जन गठरियां होंगी। काफी बड़े आकार की गठरियां। दो घर की लड़कियां उसके साथ लगी थीं गट्ठर मॉपेडContinue reading “बेलपत्र वाले विजयशंकर”
मचान के देखुआर अनूप सुकुल
<<< मचान के देखुआर अनूप सुकुल >>> कल अनूप शुक्ल जी, सपत्नीक मिलने आये। हम लोग हिंदी ब्लॉगिंग के स्वर्णकाल (?) से मित्र हैं। मेरी उनसे मुलाकात सतरह साल पहले कानपुर रेलवे स्टेशन के एक रेस्ट हाउस में हुई थी। मैं उनके लेखन का मुरीद हूं। पता नहीं वे यह भाव रेसीप्रोकेट करते हैं याContinue reading “मचान के देखुआर अनूप सुकुल”
