पूरे जून भर बादल आते रहे, अनमने से। बरसने का उनका कोई इरादा नहीं था। भदोही जिले में तो जून के अंत तक लगभग 99 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज हुई। धान की नर्सरियाँ प्रतीक्षा में सूखने लगी थीं और किसान आसमान को कुछ अधिक देर तक देखने लगे थे। मौसम विभाग के अनुमान हरContinue reading “मानसून ने चुपचाप हाजिरी लगा दी”
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एक रिटायर्ड अधिकारी का साइकिलवाद
रेलवे में नौकरी के दिनों की एक छोटी-सी आदत थी, जो तब सामान्य लगती थी। प्रयागराज या गोरखपुर के रेलवे जोनल मुख्यालय में एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर तक पैदल जाया जा सकता था, पर पैदल अकेले नहीं। साथ में चपरासी चलता था, फाइलें उठाए। बिल्डिंग के बाहर ड्राइवर कार लगाए खड़ा रहता था। वहContinue reading “एक रिटायर्ड अधिकारी का साइकिलवाद”
मेरे घर की जलमुर्गी
मेरे घर में एक जलमुर्गी आती है। मैं यह नहीं कह सकता कि वह यहीं रहती है। पक्षियों के पते मनुष्यों की तरह नहीं होते। फिर भी वह इतनी नियमितता से आती है कि घर का हिस्सा लगने लगी है। जैसे कोई पड़ोसी हो जो बिना सूचना दिए आता-जाता रहता हो। उसकी चाल मुझे शुरूContinue reading “मेरे घर की जलमुर्गी”
