सुग्गी का बड़ा बेटा है गोविंदा। गोविंद बिंद। उसकी शादी तय हो गई थी। वैसे तिलक-छकैया दो बार पहले भी हुआ, पर किसी न किसी वजह से बात अटक गई। पहली बार लड़की अच्छी थी, पर घर बहुत दूर था—चंदौली से भी आगे, करीब सौ किलोमीटर। इतनी दूर की रिश्तेदारी नहीं जमी। दूसरी बार तिलकContinue reading “गोविंदा की शादी और बदलता गांव”
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मितव्ययता की कवायद
प्रधानमंत्री जी ने जनता (पढ़ें: टैक्स भरने वालों) से कहा है कि सोना कम खरीदें, विदेश यात्राएँ टालें, ईंधन बचाएँ और मितव्ययिता अपनाएँ। हम तो 28 फरवरी को, जिस दिन पिछला गैस सिलिंडर रीफिल हुआ था, तभी से गैस चूल्हे को लगभग दरकिनार कर चुके हैं। तीन महीने बाद भी सिलिंडर आधे से अधिक भराContinue reading “मितव्ययता की कवायद”
सब देवता हैं — पूजा पा कर प्रसन्न हो जाते हैं
अवैध खनन की मिट्टी ले जाता ट्रैक्टर नहीं चाहता कि उसकी पारी मिस हो। वह जल्दी में रहता है। ट्रॉली क्षमता से अधिक लादी जाती है। गांव की जर्जर सड़कों पर ट्रैक्टर दौड़ते हैं। थोड़ा भी गड्ढा मिले तो संतुलन बिगड़ सकता है। ऊपर से चलाने वाले अक्सर 17-20 साल के लड़के होते हैं —Continue reading “सब देवता हैं — पूजा पा कर प्रसन्न हो जाते हैं”
