कैसे लाऊं जिप्सियाना स्वभाव


छब्बीस दिसम्बर को मेरा दफ्तर इलाहाबाद में सिविल लाइन्स से बदल कर सुबेदारगंज चला गया। महाप्रबंधक कार्यालय का उद्घाटन तो पिछले महीने ही हो गया था। मेरे दफ्तर का शिफ्टिंग अब हुआ। बड़ी आलीशान इमारत है नये दफ्तर की। खुला वातावरण। पर मैं अवसादग्रस्त हो गया हूं। नयी जगह पर अटपटा लग रहा है। ट्यूबContinue reading “कैसे लाऊं जिप्सियाना स्वभाव”

मोकालू गुरू का चपन्त चलउआ


भरतलाल का गांव1 इलाहाबाद-वाराणसी ग्राण्ड-ट्रंक रोड और पूर्वोत्तर रेलवे की रेल लाइन के बीच में स्थित है। सड़क पर चलते वाहनों की चपेट में आ कर और ट्रेन से कट कर आसपास के कई लोग कालकवलित होते हैं। इससे भूत-प्रेतों की संख्या सतत बढ़ती रहती है। भूत प्रेतों की आबादी को डील करने के लियेContinue reading “मोकालू गुरू का चपन्त चलउआ”

इस्लामिक एपॉस्टसी की अवधारणायें


कुछ दिन पहले तेजी बच्चन जी के निधन का समाचार मिला। इसको याद कर मुझे इण्टरनेट पर किसी जवाहरा सैदुल्ला के इलाहाबाद के संस्मरणों वाला एक लेख स्मरण हो आया; जिसमें तेजी बच्चन, फिराक गोरखपुरी, अमिताभ के जन्मदिन पर दी गयी पार्टी आदि का जिक्र था। उसे मैने कई महीने पहले पढ़ा था। इण्टरनेट परContinue reading “इस्लामिक एपॉस्टसी की अवधारणायें”

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