जंगली वृक्षों से शहरी पर्यावरण सुधार का नियोजन करें


यह है श्री पंकज अवधिया का बुधवासरीय अतिथि लेख। आप पहले के लेख पंकज अवधिया पर लेबल सर्च से देख सकते हैं। इस पोस्ट में पंकज जी शहरों के पर्यावरण सुधार के लिये भारतीय जंगली वृक्षों के नियोजित रोपण की बात कर रहे हैं। जब गर्मियो मे हमारा काफिला जंगलो से गुजरता है तो अक्सरContinue reading “जंगली वृक्षों से शहरी पर्यावरण सुधार का नियोजन करें”

हिन्दी स्लैंग्स बताइये जी!


स्लैंग्स भाषा को समृद्ध करते हैं। शिवकुमार मिश्र का इनफॉर्मल ग्रुप जो स्लैंग्स जनरेट करता है, वह यदा-कदा मैं अपने ब्लॉग पर ठेल दिया करता हूं। उन्होंने एक शब्द बताया था -"खतम"। इसपर मैने एक पोस्ट लिखी थी – आप तो बिल्कुल खतम आदमी हैं। एक अन्य स्लैंग शब्द है "कसवाना", जिसे मुझे उपेंद्र कुमारContinue reading “हिन्दी स्लैंग्स बताइये जी!”

संतृप्त, मुदित और असंवेदनशील है भारतीय मध्यवर्ग


हर रोज हम लोग लिख रहे हैं। हिन्दी लिखने की मूलभूत समस्या और जद्दोजहद के बावजूद हम लोग लिख रहे हैं। रोज लिखते हैं, छाप देते हैं। मुझे विश्वास है कि अपनी पोस्ट बरम्बार निहारते भी होंगे। और शायद अपनी पोस्ट जितनी बार खोलते हैं, वह औरों की पोस्टें खोलने-पढ़ने से कम नहीं होगा। पोस्टContinue reading “संतृप्त, मुदित और असंवेदनशील है भारतीय मध्यवर्ग”

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