रेगुलरहा सुकुल ने दिया फेयरवेल


एक लम्बी कद-काठी के साठ वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति को गोरखपुर की रेलवे कॉलोनी में रोज सवेरे शाम घूमते देखता था। एक ही चाल से। हर मौसम में। कड़ाके की ठण्ड में भी। कोहरा इतना घना होता था कि तीन चार मीटर से ज्यादा दिखाई न दे। मैं अपने गोलू पाण्डेय (मेरा दिवंगतContinue reading “रेगुलरहा सुकुल ने दिया फेयरवेल”

मेरी दोषारोपण तालिका


मेरी दोषारोपण तालिका मेरी जिन्दगी में क्या गड़बड़ है? और उस गड़बड़ के लिये दोषी कौन है? मेरा १५ किलो अतिरिक्त वजन मेरी अनुवांशिकता। हाइपोथायराइडिज्म की बीमारी। घर के पास घूमने को अच्छे स्थान की कमी। गोलू पाण्डेय का असामयिक निधन (उसे घुमाने ले जाने के बहाने घूमना पड़ता था)। मेरे दफ्तर के काम काContinue reading “मेरी दोषारोपण तालिका”

दीये बेचती मल्लाहिन परुली?


वाराणसी का मेरा सरकारी निवास। पुराना, दीमक, छिपकलियों और बारिश की टपकन से युक्त, पर एक शानदार एन्टीक पीस! सन २००५ की देव दीपावली। हम वाराणसी में रहते थे। उस समय की देव दीपावली का दिन। शाम ढ़ल गयी थी। गंगा आरती सम्पन्न हो गयी थी। हम लोग एक नाव पर सवार दृष्य देख रहेContinue reading “दीये बेचती मल्लाहिन परुली?”

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