कछार रिपोर्ताज – 3


बहुत कम होता है, या हूं कहूं कि शिवकुटी के इस हिस्से में पहली बार देखा – कोई अपने प्रिय (शायद पालतू जानवर) को दफना गया था रेत में। एक गेरुआ कपड़ा और गेन्दा की माला थे कब्र के ऊपर। एक काला कुत्ता कब्र खोदने का प्रयास कर रहा था। भगाने पर भी वहीं आContinue reading “कछार रिपोर्ताज – 3”

कछार रिपोर्ताज – 2


होली के बिहान (9 मार्च) सवेरे घूमने गया तो आसमान साफ था। सूर्योदय मेरे सामने हुआ। ललिमा नहीं थी – कुछ पीला पन लिये थे सूर्य देव। जवाहिरलाल ने अलाव जला लिया था। हवा में कल की अपेक्षा कुछ सर्दी थी। गंगाजी के पानी से भाप उठती दिख रही थी, अत: पानी के ऊपर दिखाईContinue reading “कछार रिपोर्ताज – 2”

कछार रिपोर्ताज


कल्लू की मटर बेकार हो गयी थी। पर बगल में जो सरसों बोई थी, वह बढ़िया हुई। आज होली के दिन सवेरे घूमने गया तो देखा कि सरसों काट कर गट्ठर खेत में रखे हैं। खेत के आकार के हिसाब से ठीकठाक निकल आयेगी सरसों। इनकी सिंचाई के लिये गंगाजी का पानी नहीं, शिवकुटी, चिल्लाContinue reading “कछार रिपोर्ताज”

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free