गांव लौटे लोग बिना रोजगार ज्यादा बैठ नहीं पायेंगे #गांवकाचिठ्ठा


अगर उन्हें घर पर रहते हुये एक सम्मानजनक व्यवसाय मिल जाता है, जो प्रवास से भले ही कुछ कम आमदनी दे, तो वे सब यहीं रुक जायेंगे और यह समाज और उत्तर प्रदेश की बड़ी जीत होगी।

माणिक सेठ कहते हैं जिंदगी गोलों में बंध गयी है


“अब बस यही गोले हैं, और गोलों में खड़े ग्राहक। जिंदगी गोलों में बंध गयी है। पता नहीं कितने दिन चलेगा। शायद लम्बा ही चलेगा!” – माणिक कहते हैं।

ऑनलाइन और मॉल से गांव के किराना स्टोर की ओर


आशा है भविष्य में उनकी किराना दुकान से लम्बा एसोसियेशन रहेगा। लॉकडाउन काल में ही नहीं, उत्तर-कोरोना युग में भी।

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