काशीनाथ पाठक का मुरब्बा व्यवसाय – पुरानी पोस्ट


मेरे सामने ठोस और सफ़ल ग्रामीण उद्यमिता का उदाहरण उपस्थित था! इण्डिया अन-इन्कार्पोरेटेड! भारत की हजारों साल की रस्टिक उद्यमिता का प्रमाण। एक बेरोजगार व्यक्ति न केवल स्वयं की आजीविका कमा रहा है, वरन गांव की कई महिलाओं को रोजगार भी दे रहा है।

प्राकृतिक संसाधनों की नोच खसोट गांव का चरित्र बनता जा रहा है #गांवकाचिठ्ठा


शहरों का जो स्वरूप है, सो है। गांवदेहात में पैसा कम है, प्रकृति प्रचुर है। तो प्रकृति को ही बेच कर पैसा बनाने की कवायद (जोरशोर से) हो रही है।

गोविंद पटेल ने लॉकडाउन में सीखा मछली पकड़ना #गांवकाचिठ्ठा


लॉकडाउन काल में, जब लोग आजीविका के व्यवधान के कारण दाल और तरकारी के मद में जबरदस्त कटौती कर रहे हैं; तब रोज चार घण्टा गंगा किनारे 2-4 किलो मछली पकड़ लेना बहुत सही स्ट्रेटेजी है लॉकडाउन की कठिनाई से पार पाने की।

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