काला सिरिस (Albizia lebbeck)  का सूखा पेड़ 


नेशनल हाइवे से दिखता था। सफ़ेद विशालकाय वृक्ष। अगर छोटा होता तो मैं उसे कचनार समझता। इस मौसम में कचनार फूलता है। उसके फूल बैंजनी होते हैं पर कोई कोई पूरे सफ़ेद भी होते हैं। जब फूल लदते हैं तो पत्तियां नहीं दिखतीं। पूरा वृक्ष बैंजनी या सफ़ेद होता है।  पर यह कचनार नहीं था।Continue reading “काला सिरिस (Albizia lebbeck)  का सूखा पेड़ “

खुले में शौच


सन 1987 में मैने अपने बाबा का दाह संस्कार किया था। गांव में लगभग दो सप्ताह रहा उनके क्रिया-कर्म सम्पादित करने के लिये। दस दिन तक अछूत था मैं। अपना भोजन नहीं बनाता था। घर में एक बुआ जी बना देती थीं और भोजन की पत्तल मेरी तरफ़ सरका देती थीं। अगर रोटी अतिरिक्त देनीContinue reading “खुले में शौच”

अरहर के पौधे


उन्हे पौधे कहना एक अण्डर स्टेटमेण्ट होगा। आठ दस फुट के हो गये हैं, पेड़ जैसे हैं। फूल लगे हैं। यूं कहें कि फूलों से लदे हैं। करीब दो दर्जन होंगे। गांव के मेरे घर में अनाधिकार आये और साधिकार रह रहे हैं। पिछले सीजन में जो थोड़ी बहुत अरहर हुई थी खेत में; फसलContinue reading “अरहर के पौधे”

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