बंगाली कुटुम्ब के रात्रि-भोज में


बहुत बड़ा कुटुम्ब था वह। कई स्थानों से आये लोग थे। पिछले कई दिन से यहां पर थे – श्री प्रतुल कुमार लाहिड़ी के पौत्र शुभमन्यु (ईशान) के उपनयन संस्कार के अवसर पर। संस्कार 4 अप्रेल को हुआ था। पांच अप्रेल की रात समारोह के समापन के अवसर पर एक भोज समारोह था। सब उसीContinue reading “बंगाली कुटुम्ब के रात्रि-भोज में”

झरे हुये पत्ते


रेलवे कालोनी, गोरखपुर में पेड़ बहुत हैं। हरा भरा क्षेत्र। सो पत्ते भी बहुत झरते हैं। सींक वाली बेंट लगी बड़ी झाड़ुओं से बुहारते देखता हूं सवेरे कर्मियों को। बुहार कर पत्तों की ढेरियां बनाते पाया है। पर उसके बाद प्रश्न था कि क्या किया जाता है इन सूखी पत्तियों का? कहीं कहीं जलाया हुआContinue reading “झरे हुये पत्ते”

गोल्फार के चीड़, शालवन और बंसवारी


  प्रवीण पाण्डेय यहाँ थे कल और आज। वाराणसी में पदस्थापित हुये हैं। दोपहर की किसी गाड़ी से जा रहे हैं बनारस। पता नहीं किसी ने सलाह दी या नहीं, कि पहले काशी कोतवाल – काल भैरव को नमस्कार करना चाहिये। फिर उस कर्म क्षेत्र में प्रवेश जो भयंकर अराजकता का सौन्दर्य अपने में समाहितContinue reading “गोल्फार के चीड़, शालवन और बंसवारी”

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