अचिन्त्य लाहिड़ी


अचिन्त्य पहले नॉन रेलवे के अपरिचित हैं जो गोरखपुर में मुझसे मिलने मेरे दफ्तर आये। गोरखपुर में पीढ़ियों पहले से आये बंगाली परिवार से हैं वे। उन्होने बताया कि उनका परिवार सन 1887 में बंगाल से यहां आया। सवा सौ से अधिक वर्षों से गोरखपुरी-बंगाली! अठ्ठारह सौ अस्सी के समय में बहुत से बंगाली परिवारContinue reading “अचिन्त्य लाहिड़ी”

गोरखपुर रेलवे कॉलोनी में सवेरे की सैर


सवेरे की सैर का मजा गोरखपुर रेलवे कॉलोनी में उतना तो नहीं, जितना गंगाजी के कछार में है। पर वृक्ष और वनस्पति कछार की रेत, सब्जियों की खेती और चटक सूर्योदय की कुछ तो भरपाई करते है हैं। आजकल फागुन है तो वसन्त में वृक्षों में लदे फूलों की छटा कुछ और ही है। वृक्षContinue reading “गोरखपुर रेलवे कॉलोनी में सवेरे की सैर”

परमेश्वर


सवेरे साढ़े छ बजे जब मैं घूमने निकला तो वह मुझसे आगे चल रहा था। घुटने तक धोती, मटमैला/सफेद कुरता – गेरुआ नहीं, एक काली जाकेट, बदन पर ओढा चादर जो सिर पर भी ढंकने का काम कर रहा था, बायीं पीठपर बोरा नुमा झोला और पानी का एक बरतन और दायें हाथ में एकContinue reading “परमेश्वर”

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free