होमवर्क की आउटसोर्सिंग!


बच्चों का होमवर्क मम्मियां करती हैं – प्राइमरी कक्षाओं तक। पर यह तो गजब है – आस्ट्रेलिया के कम्प्यूटर साइंस के विद्यार्थी अपना होमवर्क भारत के प्रोग्रामर्स को आउटसोर्स कर दे रहे हैं! और १०० आस्ट्रेलियायी डालर्स में उनका काम पक्का कर उन्हे मिल जा रहा है। बाकायदा रेण्ट-अ-कोडर पर निविदा निकलती है। कोडर अपनीContinue reading “होमवर्क की आउटसोर्सिंग!”

एसईजेड कहां से आया बन्धुओं?


बहुत ठेलाई चल रही है तहलका छाप पत्र-पत्रिकाओं की। एक ठो नन्दी भी बड़े हैण्डी बन गये हैं। ऐसा लग रहा है कि “दास-कैपीटल” के बाद सबसे अथॉरिटेटिव कुछ है तो तहलका है!हमें लग रहा है कि हम भी कहीं से कुछ पढ़ कर ठेल दें, ताकि सनद रहे कि दखिनहे ही सही, पढ़वैया तोContinue reading “एसईजेड कहां से आया बन्धुओं?”

दफ्तर बनाम वेटिंग रूम!


मेरा दफ्तर का कक्ष मेरे कमरे में चपरासी कार्ड पंहुचाता है – इम्प्रेसिव से लगने वाले कार्ड पर किसी फर्म के वरिष्ठ अधिकारी का लिखा नाम। फर्म का नाम पहचाना नहीं है। मेरे पास कोई अर्जेण्ट काम भी नहीं है। लिहाजा कमरे में बुलवाने में कोई हर्जा नहीं। सज्जन के कमरे में घुसने से पहलेContinue reading “दफ्तर बनाम वेटिंग रूम!”

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