लॉकडाउन काल में सुबह की चाय पर बातचीत


शैलेंद्र ने कहा – कितनी शांति है दिदिया। लॉकडाउन के इस काल में, घर में किसी की कोई डिमाण्ड नहीं है। सबको पता है कि जितना है, उसी में गुजारा करना है।

एक किसान का उपहार


सवेरे की साइकिल सैर के दौरान इस उपहार ने मुझे हृदय के अन्दर तक सींच दिया। वापस लौटते समय पूरे रास्ते मैं विजयशंकर जी के बारे में ही सोचता रहा। अगर एक किसान – एक मार्जिनल किसान इतनी दरियादिली रखता है तो मुझे तो अपने दिल को और भी खोलना चाहिये।

तालाब में फंसी घायल नीलगाय


नीलगाय किनारे लगा। उसके एक पैर में शायद चोट लगी थी। इसी कारण वह कुत्तों के चंगुल में आ गया था। भयभीत था और उसकी दुम उसके पृष्ठभाग में दबी हुई थी।

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