रवींद्रनाथ जी अपने गांव से हर समय किसी न किसी प्रकार जुड़े रहे हैं। वे मेरी तरह “बाहरी” नहीं हैं।
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भाग, करोना भाग!
नौ बजे, पास के बस्ती के कुछ बच्चे जोर जोर से “भाग, करोना भाग!” का सामुहिक नारा भी बार बार लगा रहे थे। … कुल मिला कर पूरे देश के एक साथ होने का भाव गहरे में महसूस हो रहा था।
कोरोना के बाद बेहतर समय आयेगा? – रीता पाण्डेय
वाह कोरोना! वाह लॉकडाउन! इनके चक्कर में भूले बिसरे लोग-रिश्ते जुड़ रहे हैं। न आदमी घर में बन्द होता, न अतीत की याद करता और न बचपन के सम्बन्ध खोजता।
