छिपकलियां


***छिपकलियां*** पिछले दिनों मेरे घर में पुताई हुई। सात-आठ साल बाद। घर में अटाला साफ हुआ। एक दो दीवार पर चढ़ने वाले मेढक घर में रहते थे; वे शराफत से बाहर भाग गये। कई छोटी बड़ी छिपकलियां थीं; वे मानती थीं कि घर उन्ही का है। बाहर निकलने को तैयार नहीं थीं। पिंटू-बड़े लाल-गुड्डू कीContinue reading “छिपकलियां”

“गंगा का पानी निर्मल है, पीने का मन करेगा”


मुझसे बात करने के लिये कमलेश बोले – “गुरूजी, आप तो बुद्धिमान हैं। आप तो जानते होंगे कि क्या रात बारह बजे गंगाजी एक बारगी बहना बंद कर थम जाती हैं?”

बदलते समय में संत लाल


संतलाल दुकान पर बैठते हैं, ग्राहक से बोलते, बतियाते और डील करते हैं। उस हिसाब से वे ‘चलन’ में हैं। पर आगे हर मशीन, हर गैजेट में एआई घुस जायेगा। तकनीकी के प्रति निस्पृहता कितनी और कैसे कायम रख कर प्रासंगिक बने रहेंगे?

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