महंत कैलाश गिरि, नागा बाबा जूना अखाड़ा


सवेरे के मित्र मेरे घरपरिसर के पेड़ पौधे और जीव होते थे। आज मेरा सौभाग्य था कि बाबा जी अपने से आ गये। जाते जाते मेरे परिवार को, मेरी पत्नी, बिटिया-दामाद और बेटा-बहू को भी आशीर्वाद दे कर गये।

घर परिसर में साइकिल और मानसिक- यात्रा


मेरा मानसिक डूप्लीकेट नागेश्वर बहुधा मुझसे कहता है कि वह भी बूढ़ा हो रहा है। इससे पहले कि वह भी बिस्तर तक सीमित हो जाये या डिमेंशिया का शिकार हो, वह अभिव्यक्त हो जाना चाहता है। नागेश्वर का व्यक्तित्व मुझे निखारना-गढ़ना है।

सवेरे की चाय


हरे भरे परिसर में प्रकृति के बीच आधा-आधा लीटर चाय सेवन! गर फिरदौस बर रुये जमीन अस्त्। अगर पृथ्वी पर स्वर्ग कहीं है तो वह इंटरमिटेंट फास्टिंग के बाद सवेरे के चाय के इस अनुष्ठान में ही है। यहीं है, यहीं है और यहीं ही है!

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