रविवार भोर ६ बजे


तख्ती पर बैठे पण्डा। जजमानों के इन्तजार में। गंगा तट पर नहाते पुरुष और स्त्रियां। पण्डा के बाईं ओर जमीन पर बैठा मुखारी करता जवाहिर लाल। गंगा बढ़ी हुई हैं। सावन में ही भदईं गंगा का अहसास! मात्र ९० डिग्री के कोण घूम कर उसी स्थान से लिया यह कोटेश्वर महादेव के मंदिर का चित्र!Continue reading “रविवार भोर ६ बजे”

बिज्जू


स्वप्न, बीमार हो तो बहुत आते हैं। स्वप्न में हल्की रोशनी में दीखता है मुझे बिज्जू। जंगली बिलाव सा कोई जन्तु। वह भी मुझे देख चुका है। आत्म रक्षा में अपनी जगह बैठे गुर्राहट के साथ दांत बाहर निकाल रहा है। मुझे प्रतिक्रिया करने की जरूरत नहीं है। अपने रास्ते निकल सकता हूं। पर आशंकितContinue reading “बिज्जू”

नत्तू गुण्डा पांड़े


आगे टीशर्ट चढ़ी तोंद और पीछे डायपर युक्त तशरीफ लिये साल भर के नत्तू को जब उसकी मां घसीट कर कमरे में ले जाने का यत्न करती है तो बद्द-बद्द चलते वह दूसरे हाथ और दोनो पैर से जो भी चीज सीमा में आ जाती है, उसको गिराने-लुढ़काने या ठोकर मारने का पूरा प्रयास करताContinue reading “नत्तू गुण्डा पांड़े”

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