इतिहास में घूमना


सवेरे मैं अपने काम का खटराग छेडने से पहले थोडा आस-पास घूमता हूं। मेरा लड़का साथ में रहता है – शैडो की तरह। वह इस लिये कि (तथाकथित रूप से) बीमार उसका पिता अगर लड़खड़ा कर गिरे तो वह संभाल ले। कभी जरूरत नहीं पड़ी; पर क्या पता पड़ ही जाये! वैसे घूमना सड़क परContinue reading “इतिहास में घूमना”

निठल्ला


बिना अपना काम किये कैसे जिया जा सकता है? पिछले डेढ़ महीने मेरे लिये बहुत यातनामय रहे, जब मेरी कार्यक्षमता कम थी और सरकारी काम के प्रति पूरा न्याय नहीं हो पा रहा था। पढ़ा कि कई उच्च मध्य वर्ग की महिलायें स्कूल में मास्टरानियों के पद पर हैं। पर स्कूल नहीं जातीं। अपना हस्ताक्षरContinue reading “निठल्ला”

छोटू सपेरे की मोनी


नागपंचमी के दिन घाट पर कुछ अंधे बैठे थे। सामने कथरी बिछाये। गंगा नहा आते लोग अपनी श्रद्धा वश कुछ अन्न या पैसा उनकी कथरी पर गिराते जा रहे थे। उन्ही के पास बैठा था एक लड़का। पैंट-बुशशर्ट पहने। कई दिनों से न नहाने से उलझे बाल। बीन और सांप रखने वाली मोनी (बांस कीContinue reading “छोटू सपेरे की मोनी”

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